जिन लोगों को यह लगता है कि सरकार का यह फैसला यूपी-पंजाब के आसन्न चुनावों में लाभ लेने की मंशा से है,वे ग़लतफ़हमी में है|भारत में अभी इस प्रकार का राष्ट्र-बोध विकसित नहीं हो पाया है कि लोग राष्ट्रीय हितों को निजी हितों से ऊपर समझें|छोटे-छोटे शहरों-कस्बों-महानगरों के तमाम छोटे-बड़े व्यापारी जो कर अदा किए बिना व्यापार कर रहे थे,उनमें गहरी बौखलाहट है|जिनका पैसा डूबा है वे वर्तमान सरकार को 2019 में वोट देंगे,यह संभव नहीं|तुष्टिकरण के दौर वाले राजनीतिक युग में सरकार ने अपने आधार वोट-बैंक को नाराज़ करने का जोखिम लिया है|सरकार का फ़ैसला भले ही देश-हित में हो पर पैसे में बड़ी ताकत होती है,पैसा अनेक प्रकार से अपनी भूमिका निभाता है|वह जनता के मूड को बदलने में भी सहायक है|यह देखना दिलचस्प होगा कि 2019 के चुनाव पर इस फ़ैसले का क्या प्रभाव पड़ता है|